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प्रतिभाशाली बालक: Gifted Talented Child-CTET Notes

By Admin Team

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प्रतिभाशाली बालक: (Talented Child) : CTET Notes 

प्रतिभाशाली बालक उन बालकों को कहा जाता है, जिनकी बौद्धिक क्षमताएँ सामान्य बालकों की अपेक्षा अधिक होती है। ये जीवन के विभिनन क्षेत्रो में विशिष्ट प्रदर्शन करते है।

  • प्रतिभाशाली बालक समान्य बालकों की तुलना में सभी बातों में क्षेष्ठतर होता है।
  • ये बालक आपनी श्रेष्ठता के कारण विद्यालय स्तर पर आगे रहते है, सबसे उच्च स्थान प्राप्त करते है, और इन विभिन्न क्षेत्रों में उनका स्थान उच्च होता है जैसेः विज्ञान, गाणित, कला, सृजनात्मक लेखन इत्यादि में उच्च स्तरीय प्रतिभा रखते है, ऐसे बालक प्रतिभाशाली बालकों (Talented Children) की क्षेणी में आते है।
  • टर्मन के अनुसार: ऐसे बालको की बुद्धिलाधि 140 से ऊपर होती है जबकि मिल के अनुसार 190 से 200 बुद्धि – लाधि वाले बालक प्रतिभाशाली होते है।
  • विटी के अनुसार: प्रतिभाशाली बालक संगीत, कला, सामाजिक नेतृत्व तथा दूसरे विभिन्न क्षत्रो में अच्छा प्रदर्शन करते है।
  • रिकनर व हैरीमैन के अनुसार: ” प्रतिभाशाली ” शब्द का प्रयोग उन 1℅ बालकों के लिए किया जाता हैं, जो सबसे अधिक बुद्धिमान होते हैं”

प्रतिभाशाली बालक की विशेषता:

  • विशाल शब्दकोष
  • मानसिक प्रक्रिया तीव्रता
  • दैनिक कार्यो में भिन्नता
  • उच्च बुद्धि – लाब्धि (130 से 170)
  • आश्चर्य जनक अंतर्दृष्टि का प्रमाण
  • अध्ययन में अद्धितीय सफलता
  • सामान्य ज्ञान की श्रेष्ठता
  • सामान्य अध्यान मे रूचि
  • कोई भी पाठ आसानी से सीखना
  • आपने साथियों की तुलना में अधिक ज्ञान
  • जोखिम (Risk) उठाने की क्षमता
  • कठिन मानसिक कार्यो को भी आसानी से करने मे सक्षम
  • चरित्र एवं व्यक्तित्व अन्य बालकों से भिन्न होना
  • किसी प्रश्न का उत्तर शीघ्र देने की कोशिश करना
  • सकारात्मक आत्मिश्वास
  • रूचियों का क्षेत्र विस्तृत
  • अत्यन्त जिजासु प्रवृति
  • नेतृत्व कौशल का होना
  • चरित्र एंव व्यक्तित्व अन्य बालकों से भिन्न होना
  • विषय – वस्तु के आलावा सहायक पुस्तकों ( कहानी, उपन्यास, पेपर, पत्रिका) का अध्ययन करना
See also  थार्नडाइक के प्रयास एवं भूल ( त्रुटि ) सिद्धांत ( Trial & Error theory )

प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा

  • हैविगस्टाँ के अनुसार: ” प्रतिभाशाली बालकों के लिए शिक्षा का सफल कार्यक्रम वही हो सकता है जिसका उद्देश्य उनकी विभिन्न योग्यताओं का विकास करना हो। “

इस कथन के अनुसार बच्चों की शिक्षा का कार्यक्रम इस प्रकार होना चाहिए- 

  • सामान्य रूप से कक्षोंन्रति
  • विशेष व विस्तृत पाठयक्रम सहगामी कियाओं का आयोजन
  • व्यक्तित्व का पूर्ण विकास
  • नेतृत्व का प्रशिक्षण

सृजनात्मक बालक (Creative Child)

सृजनात्मकता: सृजनात्मक शब्द अंग्रेजी के ” Creative” शब्द से बना है।

जेम्स ड्रेवर के अनुसार: ” अनिवार्य रूप से किसी नयी क्स्तु का सृजन करना ही सृजनात्मक है”

 

सृजनात्मक के तत्वः

  • तात्कालिक परिस्थिति से परे जाने की योग्यता
  • समस्या का पुनव्र्याख्या
  • सामंजस्य
  • अन्य विचारों में परिवर्तन

 

सृजनात्मकता के सिद्धात:

  • मनोविश्लेषणात्मक
  • सहचार्यवाद
  • अंतः दृष्टिवाद
  • अरिस्तत्ववाद

सृजनात्मकता की पहचान:

  • सृजनात्मक बालक में मौलिकता के दर्शन होते हैं।
  • सृजनात्मक बालक का द्वाष्टिकोण आम व्यकितयों से अलग होता है
  • स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता
  • सृजनात्मक बालक में हंसी मजाक की प्रवृति पायी जाती।
  • उत्सुकता भी सृजनात्मकता का एक प्रमुख तत्व है।
  • संवेदनशीलता

 

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