मन्द बुद्धि बालक (Mentally Retarded Children)

मंदबुद्धि बालक की परिभाषा तथा अर्थ

मन्द- बुद्धि बालक का अर्थः

ऐसे बालक से है जो ” मानसिक” रूप से कमजोर होते है, जिनके मानसिक और बुद्धि इतने कम विकसित हैं कि उनमें मानसिक क्षमताएँ कम विकसित होती है, ऐसे बालको को मन्द-बुद्धि बालक, धीमी गति से सीखने वाले बालक, मानसिक रूय से पिछड़ा बालक तथा मानसिक रूप से विकलांग बालक इन सभी नामों का प्रयोग किया जाता है।

  • क्रो एवं क्रो के अनुसार: “ऐसे बालक जिनकी बुद्धिलीब्ध 70 से कम होती है, उनको मन्दबुद्धि बालक कहते हैं।”
  • पोलक व पोलक के अनुसार: “मन्दबुद्धि बालक को अब क्षीण बुद्धि बालकों के समूह में नहीं रखा जाता है, जिसके लिए कुध भी नहीं किया जा सकता है। अब हम स्वीकर करते है कि उनके व्यक्तित्व के उतने ही विभिन पहलू होते है जितने सामान्य बालकों के व्यक्तित्व होता है।”
  • मन्दबुद्धि बालक अपनी मानसिक योग्यताओ का प्रयोग करने की दृष्टि से उसी प्रकार अपंग व बेबस होता है जिस प्रकार से शारीरिक रूप से विकलांग बालक अंपग व बेबस होता है।
  • मन्दबुद्धि बालकों को पढ़ने- लिखने व समायोजन करने में कठिनाई होती है।
  • एसे बालक जिनकी बुद्धि लब्धि 80 या 85 से कम होती है, प्रायः मंद बुद्धि बालक कहलाते है।
  • एसे बालको में आत्मविश्वास की कमी होती है।
  • कभी – कभी परिवार का पिछडेपन और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ के करण बालक मानसिक रूप से पिछड जाते है।
  • ऐसे बालक जटिल परिस्थितियों को सीखने में प्रायः असफल रहते है।
  • ऐसे बालकों की सीखने की गति मंद होती है।
  • ऐसे बालकों की शिक्षा के लिए अध्यापकों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
  • ऐसे बालकों के लिए विशेष प्रकार के स्कूलों एवं अस्पतालों की भी व्यवस्था होती है।
  • ऐसे बालक दूसरों की थोड़ी भी चिन्ता न करने की बजाय अपनी चिन्ता करते है।
  • ऐसे बालकों में आत्म- विश्वास कम होता है, इनके सीखने की गति मंद होती है तथा सीखने में त्रुटियाँ अधिक होती है।

मन्दबुद्धिता के कारणः

  1. वंशानुक्रम (Heredity)
  2. सांस्कृतिक कारक (Cultural Factors)
  3. छूत की बीमारियाँ (Infectious Diseases)
  4. ग्रन्थीय असन्तुलन (Glandular Imbalance)
  5. शारीरिक आधात (Physical Injuries)
  6. नशीले पदार्थ (Toxic Agents)
  7. माता-पिता की आयु (Age of Parents)
  8. परिवारिक वातावरण ( Home Environment)
  9. शैशिक वातावरण ( Educational Environment)
  10. अपरिपक्व जन्म (Pre – Mature Birth)
  11. माँ के संक्रामक रोग (Mother’s Infection Disease)

मन्द बुद्धिता के स्तर ( Level of Feeble Mindedness) 

मुख्य रूप से मन्दबुद्धिता तीन प्रकार की होती हैं:

  1. जड़ बुद्धि (Idiot): ऐसे बुद्धि वालो की I.Q अधिक से अधिक 25 होती है। मानसिक दुर्बलता के कारण ये सर्वाधिक दुर्बल बुद्धि के होते हैं तथा 2 वर्ष के बालक की तरहा इनका मानसिक विकास होता है। इनको भोजन कराना तथा वस्त्र पहनाना पड़ता है।
  2. मूढ़ (Imbecile): ऐसे बालक जिनकी IQ 25 से 50 तक होती है, ये दुर्बल बुद्धि वाले बालक हैं, इनकी मानसिक स्तर 3 – 7 वर्ष के बालक की तरह होती है।
  3. मूर्ख (Moron): ऐसे बालक जिनकी IQ 50 से 70 तक होती है। ऐसे बालकों का मानसिक विकास 7 से 10 वर्ष तक के बालकों के स्तर का होता है।
See also  शिक्षा के क्षेत्र में शिषण (Teaching) तथा अधिगम

मन्दबुद्धि बालकों की समस्याएँ : (Problems of Mentally Regarded Children) 

  1. परिवार में समायोजन की समस्या: जन्म के बाद जब कोई बालक अपने माता-पिता की सपनो को उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाता तो माता-पिता का व्यवहार उस बच्चे के लिए अच्छा नही होता और वे बच्चे के प्रति लापरवाहीपूर्ण रवैया रखते हैं।

माता – पिता को अपने परिवार समायोजन समस्या को दूर करने के लिए निम्नलिखित प्रयास करने की आवश्यकता है:

  • अच्छी आदतों का विकास
  • उचित शारीरिक देखभाल
  • सहानुभीपूर्ण व्यवहार
  1. सामाजिक समायोजन की समस्या: ऐसे बालक मन्दबुद्धि बालक होने की वजह से सामाजिक समायोजन कर पाने में असमर्थ होते हैं, क्योंकि ऐसे बालों को को अपनी आयु के बालकों से बुद्धि कम होने के कारण उन्हें बेवकूफ  आदि शब्दों से चिढ़ाया जाता है। अक्सर इन बालकों के साथ बच्चे खेलना पसंद नहीं करते क्योंकि वह खेलों में गलतियां करते हैं।

ऐसे बालकों में सामाजिक समायोजन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए: 

  • समाज इन बालकों को समाजिक सदस्य के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
  • ऐसे बालको का मजाक ना बनाया जाए ना ही  दया दिखाई जाए बल्कि उनकी आवश्यकताओं को पूरा किया जाए।
  • ऐसे बालकों को शिक्षा प्रदान करने के लिए और परीक्षण देने के लिए अलग स्कूलों की व्यवस्था की जाए जहां निशुल्क शिक्षा व परीक्षण दिया जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
  • समाज द्वारा इन बालकों के लिए विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए जैसे कि इन बच्चों की मानसिक योग्यता को ध्यान में रखकर विशेष स्कूल खेल-कूद और मनोरंजन के स्थान आदि की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  1. विद्यालयों में समायोजन की समस्या: ऐसे बालक जो मंदबुद्धि है पर उनकी बुद्धि लब्धि ठीक है तो  उन्हें पढ़ाया जा सकता है। अगर इन बालकों को सामान्य बालकों के साथ पढ़ाया लिखाया जाए तो वह  आने वालों को से पिछड़ जाते हैं, और एक ही कक्षा में कई बार फेल हो जाते हैं जिससे पूरे दे जिससे वह विद्यालय में समायोजन स्थापित नहीं कर पाते इन बालकों के अंदर शिक्षण तथा स्कूल के प्रति नकारात्मक प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है जिन से इनका विकास नहीं हो पाता।
  • ऐसे बालकों की समस्या के समाधान के लिए विद्यालय समायोजन को पहले बच्चे का मानसिक स्तर समझना चाहिए और उसी के अनुसार शिक्षा प्रदान करनी चाहिए।

बौद्धिक स्तर के आधार पर मंदबुद्धि बालक तीन प्रकार के होते हैं: 

  • शिक्षा पाने योग्य मंदबुद्धि बालक उन्हें सामान्य बालकों के साथ नहीं पढ़ाया जाना चाहिए।
  • परीक्षण योग्य मंदबुद्धि ऐसे बालक जिनकी बुद्धि लब्धि 70 से कम और 50 से 60 के बीच होती है उन्हें पढ़ाया लिखा ना नहीं सिखाया जा सकता। ऐसे बालकों को धीरे-धीरे प्रशिक्षित किया जा सकता है।
  • ऐसे बालकों को खेलो द्वारा गीतों में कविता और द्वारा विभिन्न प्रकार के परीक्षक जैसे स्वयं की देखभाल करना भोजन करना वस्त्र पहनना आदि सिखाया जा सकता है।
See also  Concept of Education and Education Psychology-शिक्षा और शिक्षा मनोविज्ञान की संकल्पना

अयोग मंद बुद्धि :

मानसिक रूप से मंदबुद्धि बालक को चार भागों में बांटा गया है: 

  1. साधारण मानसिक मंदता (Mild Mental Retardation): इस श्रेणी में आने वाले बालकों की बुद्धि लब्धि (Intelligence Quotient) 52-67 के बीच होती है। इस तरह के बालकों को शिक्षा दिया जाना संभव है और यह बालक व्यस्त होने पर इनकी बुद्धि लब्धि 8 से 11 वर्ष के सामान्य बालकों के बौद्धिक स्तर के बराबर होती है।
  2. अल्प मानसिक मंदता: ( Moderate Mental Retardation): ऐसे ही बाल को की बुद्धि लब्धि 36 से 51 होती है। एसे बालकों को परिक्षण देकर उन्हें साधारण कार्य करने के लायक बनाया जा सकता है। ऐसे बालकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें साधारण कार्य करने के लायक बनाया जा सकता है। ऐसे बालकों को प्रशिक्षणीय ( Trainable) की शैक्षिक श्रेणी ( Educational Category) में रखा जाता है। ऐसे बालकों के सीखने की दर धीमी होती है।
  • ऐसे बालक सामान्यता शारीरिक रूप से बेढंगा (Clumsy) होते हैं तथा इनमें शारीरिक अनियमितता देखने को मिलती है उनका क्रियात्मक समन्वय ( Motor Co- ordination) असंतुलित होता है।
  1. गंभीर मानसिक मंदता: (Severe Mental Retardation): ऐसे बालक जिनकी बुद्धि लब्धि 20 से 25 के बीच होती है। ऐसे बालकों को आश्रित बालक(Dependent Child) या सदा दूसरों पर निर्भर रहने वाले बालक कहा जाता है।
  2. गहन मानसिक मंदता (Profound Mental Retardation): ऐसे बालक जिनकी बुद्धि लब्धि 20 से नीचे होती है मानसिक उन्हे  गहन मानसिक मंदता  वाले बालक कहा जाता है । ऐसे बालकों को संपूर्ण जीवन देखरेख चाहिए होता है। ऐसे बालक Life Support Retarded Children) की श्रेणी में आते हैं।

दोषपूर्ण अंग वाले बालक (Children with Detective Organs)

  • ऐसे बालक जो शारीरिक दोष के कारण किसी भी प्रकार के कार्य करने में असमर्थ होते हैं , ऐसे बालक को शारीरिक क्षमता से युक्त  बालक कहा जाता है। दोषपूर्ण अंग वाले बालकों का प्रकार निमित्त लिखित है-
  • दृष्टिदोष वाले बालकों को दो भागों मे रखा जा सकता है : 
  1. अंधे बालक (Blind Children): ऐसे बालक जो पूर्ण रूप से कुध नही देख पाते अंधे होते है और अंधेपन के कारण कुध सीखने मे काफी परेशानी होती। ऐसे बालको को ब्रेल (Braille) पद्धति द्वारा ही पढ़ना – लिखना सिखया जाता है। प्रायः ऐसे बालक जन्मजात अंधे होते है, परन्तु कभी कभी ऐसे भी होता है किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण पूर्ण रूप से अंधे हो जाते है।
  2. निम्न दृष्टिवाले बालक(Low Vision Children): निम्न दृष्टिवाले बालकों की समस्या अंधे बालको से अधिक गंभीर होती है, इनकी सबसे बड़ी परेशानी ये होती है, की वे सामान्य पुस्तकों के छोटे अक्षरों को नही पढ़ पाते है, ऐसे बालको को अध्यापक ब्रेल पद्धति से सीखने-पढ़ने की आदत भी नही डालते हैं।
  1. दृष्टिदोष से ग्रसित बालक: (Children with Visual Defects) : ऐसे बालक जो अपनी आँखों से कुछ भी नहीं देख सकते।
See also  Download CTET Previous Question Paper-2014 Nov PDF

अंधे बालकों की शिक्षा एवं समायोजन (Adjustment and Education of Blind Children):

इस तरहा के बालकों को शिक्षित करने के लिए विभिन्न पद्धतियाँ है, जिनका प्रयोग किया जाता हैः

  1. ब्रेल पद्धति: (Braille System): इस पद्धति द्वारा छात्रो को ब्रेल पुस्तक, ब्रेल स्लेट द्वारा पढ़ाना लिखना सिखाया जाता है। इस पद्धति को लुइस ब्रेल (Louis Braille)  ने 1830 को विकसित किया था।
  2. विशेष पाठ्यक्रम: (Special Curriculum): इन बालकों के व्यक्तित्व विकास के लिए विशेष पाठ्यक्रम का निर्माण किया गया है कुध मनोवैज्ञानिकों ने इनके पाठ्यक्रम में सामान्य सामग्री के अलावा कुध अन्य क्रियात्मक कौशल सामग्री को भी रखने की सिफारिश की है।
  3. विशिष्ट आवासीय स्कूल (Special Residential School): ऐसे बालकों को शिक्षा देने के लिए कुध मनोवैज्ञानिकों ने अलग से स्कूल स्थापित करने को कहा है। ऐसे बालकों को लिए इन स्कूलों में शिक्षा के लिए विशेष व्यवस्था होती है, शिक्षकों को छात्रों को पढ़ने के लिए विशेष ध्यान दिया जाता है।

निम्न दृष्टि के बालकों की शिक्षा एवं समायोजन (Adjustment and Education of low vision children):

  1. निम्न दृष्टि साधन (Low Vision Aids): इन बालको को द्वाष्टि-संबंधी सहायता पहुचने के लिए विभिन्न उपकरण प्रदान किया जाते है। जैसेः चश्मा संस्पर्श लेंस, टेलीस्कोप या दूरबीन।
  2. कक्षा अनुकूलन (Classroom Adaptation): ऐसे बच्चों को शिक्षा देने के लिए  कक्षा सामग्री बालकों के अनुकूल होना चाहिए: जैसे – चश्मा लेंस, टेलीस्कोप या दूरबीन।
  3. सुनकर दोहराने का अभ्यास: (Practice of Repeating by Listening): ऐसे बालकों को पढ़ने के लिए अन्य सामान्य बालकों द्वारा बोल-बोलकर कर दोहराने तथा उसे सुनने का अभ्यास कराना चाहिए।

Mock Test 

 

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रोशन AllGovtJobsIndia.in मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं,रोशन को लेखन के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है। औरAllGovtJobsIndia.in की संपादक, लेखक और ग्राफिक डिजाइनर की टीम का नेतृत्व करते हैं। अधिक जानने के लिए यहां क्लिक करें। About Us अगर आप इस वेबसाइट पर लिखना चाहते हैं तो हमें संपर्क करें,और लिखकर पैसे कमाए,नीचे दिए गए व्हाट्सएप पर संपर्क करें-

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